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Katyayana Grihyasutra – Mool (Sanskrit) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Shukla Yajurveda Grihya Sutra

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कात्यायन-गृह्यसूत्र (मूल) — Katyayana-Grihyasutra (Mool), पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा सम्पादित यह 80 पृष्ठीय Sanskrit scholarly ग्रंथ, आचार्य कात्यायन द्वारा रचित शुक्ल यजुर्वेदीय गृह्य-सूत्र का authentic मूल संस्करण प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति वैदिक कर्मकाण्ड के advanced researchers एवं practitioners के लिए एक महत्त्वपूर्ण primary scholarly resource है।

**गृह्य-सूत्र** — वैदिक कर्मकाण्ड-साहित्य की एक विशिष्ट श्रेणी — गृहस्थ-जीवन के घरेलू (गृह्य) अनुष्ठानों, षोडश-संस्कारों, तथा नित्य-नैमित्तिक कर्मों का systematic विधान प्रस्तुत करती है, जो श्रौत-सूत्रों (सार्वजनिक यज्ञ-सम्बन्धी) से भिन्न, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक धार्मिक जीवन पर केन्द्रित है।

**आचार्य कात्यायन** — शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन-काण्व परम्परा से सम्बद्ध एक प्रमुख वैदिक शास्त्रज्ञ — का यह गृह्य-सूत्र इस शाखा के गृहस्थ-अनुष्ठान-विधान का authoritative स्रोत है। यह अन्य प्रसिद्ध गृह्य-सूत्रों (आश्वलायन, पारस्कर, बौधायन) की समान परम्परा में है, किन्तु शुक्ल-यजुर्वेदीय संदर्भ में specific है।

ग्रंथ की संरचना में शामिल हैं — विवाह-संस्कार का detailed विधान, गर्भाधान से जन्म तक के संस्कार, नामकरण, अन्नप्राशन, चूडाकरण, उपनयन, समावर्तन — यह षोडश-संस्कारों का systematic exposition।

**दैनिक गृह्य-कर्म** — नित्य अग्निहोत्र, वैश्वदेव, बलि-कर्म — गृहस्थ के दैनिक obligatory duties का detailed procedural विवरण।

**पितृ-कर्म एवं श्राद्ध-विधि** — पूर्वजों के प्रति कर्तव्य, तर्पण एवं श्राद्ध की shastric विधि, तथा इसका सामाजिक-आध्यात्मिक महत्त्व।

पंडित युधिष्ठिर मीमांसक की scholarly editing methodology मूल Sanskrit sutras का authentic प्रस्तुतीकरण, आवश्यक textual-critical notes, तथा पारम्परिक commentators के साथ cross-references प्रदान करती है।

‘मूल’ प्रस्तुति — यह edition primarily मूल text — बिना विस्तृत commentary के — प्रस्तुत करता है, जो advanced scholars एवं practitioners के लिए ideal है जो original text तक direct access चाहते हैं।

80 पृष्ठीय focused आयाम एक practical, ready-to-use ritual-text के लिए उपयुक्त है, जिसे purohits एवं गृहस्थ-यजमान अपने नित्य-कर्मों में authentic reference के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

वैदिक कर्मकाण्ड के purohits, शुक्ल-यजुर्वेदीय परम्परा के अनुयायियों, गृह्य-कर्म-conductors, संस्कृत-कर्मकाण्ड-shastri के अभ्यर्थियों, वैदिक gurukulas के acharyas, तथा प्रत्येक उस serious जिज्ञासु के लिए जो कात्यायन-गृह्य-परम्परा के authentic मूल पाठ तक पहुँच चाहता है — कात्यायन-गृह्यसूत्र (मूल) एक अनिवार्य primary scholarly संसाधन है, जो इस शाखा की गृहस्थ-धर्म-परम्परा के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।

ग्रंथ में विवाह-संस्कार-सम्बन्धी सूत्रों का विशेष विस्तृत विवेचन है — वाग्दान से लेकर सप्तपदी तक की complete procedure, आवश्यक मन्त्रों का प्रामाणिक क्रम, तथा विभिन्न विवाह-सम्बन्धी rituals का shastric आधार। यह विवाह-विधि खण्ड विशेष रूप से purohits के लिए तत्काल व्यावहारिक उपयोग का है, क्योंकि विवाह गृहस्थ-जीवन का सर्वाधिक frequently-conducted संस्कार है।

पंडित मीमांसक ने ग्रंथ के परिशिष्ट में अन्य प्रचलित गृह्य-सूत्रों (आश्वलायन, पारस्कर) के साथ कात्यायन-गृह्य-सूत्र की brief comparative नोट भी प्रदान की है, जो researchers को शुक्ल-यजुर्वेदीय एवं अन्य शाखाओं की गृह्य-परम्पराओं के बीच के अंतर को समझने में सहायक है। यह comparative-scholarly-touch ग्रंथ को केवल एक isolated text से आगे व्यापक वैदिक कर्मकाण्ड-अध्ययन के संदर्भ में स्थापित करता है। इस प्रकार यह edition व्यावहारिक कर्मकाण्ड-आवश्यकता एवं scholarly authenticity — दोनों की माँगों को समान रूप से सन्तुष्ट करता है, जो इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी purohit-परिवारों के लिए एक trusted संदर्भ-ग्रंथ बनाता है। वैदिक कर्मकाण्ड-संरक्षण की दिशा में यह एक मूल्यवान एवं स्थायी योगदान है।

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