Jat Yoddho Ka Itihas (Hindi) – by Ashok Mahan Mor Gotri | Jat Warriors Heritage

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जाट योद्धाओं का इतिहास (Jat Yoddho Ka Itihas), इतिहासकार श्री अशोक महान् मोर गोत्री का यह magnum opus, 1220 पृष्ठीय हिन्दी ऐतिहासिक compendium है जो भारतवर्ष के जाट योद्धाओं की वीरता, वंशावली एवं martial heritage को समर्पित है। अमर स्वामी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह स्मारकीय कृति हिन्दी भाषा में जाट इतिहास के सर्वाधिक comprehensive scholarly treatments में से एक है, जो प्राचीन काल से आधुनिक युग तक की एक अखण्ड ऐतिहासिक यात्रा प्रस्तुत करती है।
लेखक ने अपना अध्ययन जाट जाति की प्राचीन उत्पत्ति से प्रारम्भ किया है। आर्य civilisational धारा में जाटों का स्थान, वैदिक एवं पौराणिक साहित्य में उनके उल्लेख, ज्ञाति-व्यवस्था में उनका वर्ण-निर्धारण, एवं मध्य एशिया से लेकर सिन्धु-गंगा के मैदानों तक उनकी ऐतिहासिक यात्रा — इन सब का प्रमाण-पुष्ट विवेचन प्रस्तुत है। महाभारत के यदुवंशी क्षत्रिय परम्परा से लेकर उत्तर-वैदिक काल के क्षत्रिय कुलों तक की continuity का विश्लेषण ग्रंथ की scholarly सुदृढ़ता का परिचायक है।
मध्यकालीन जाट इतिहास का खण्ड विशेष रूप से समृद्ध है। तुर्क-आक्रमणों के समय जाटों का प्रतिरोध, हिन्दू सभ्यता की रक्षा में उनकी भूमिका, स्थानीय सत्ताओं के विरुद्ध एवं विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध उनके अनेक संघर्ष — इन सब का सजीव वर्णन है। दिल्ली सल्तनत एवं मुग़ल काल में जाट योद्धाओं का heroic प्रतिरोध, गोकुला जाट का बलिदान, राजा राम जाट का संघर्ष, तथा उनके द्वारा अकबर के मक़बरे पर आक्रमण — ये ऐतिहासिक प्रसंग प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।
भरतपुर राज्य की स्थापना का इतिहास ग्रंथ का एक गौरवपूर्ण खण्ड बनाता है। महाराजा सूरज मल — जिन्हें ‘जाट प्लेटो’ तथा ‘पूर्व का अफ्लातून’ की उपाधि से सम्मानित किया गया — का व्यक्तित्व, उनकी कूटनीतिक कुशलता, सैन्य प्रतिभा एवं प्रशासनिक दक्षता का विस्तृत विवेचन इसमें है। उनकी मराठों के साथ पानीपत की तृतीय लड़ाई-सम्बन्धी रणनीति, अहमद शाह अब्दाली के विरुद्ध संघर्ष, तथा भरतपुर के दुर्ग की अद्वितीय सुरक्षा-व्यवस्था — इन सब का प्रामाणिक वर्णन है। सिनसिनवार वंश की वंशावली एवं उपलब्धियाँ ग्रंथ में सम्यक् रूप से दर्ज हैं।
औरंगज़ेब के शासन काल में जाट प्रतिरोध का अध्याय अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। तिलपत के युद्ध में गोकुला सिंह जाट का बलिदान, सिनसिनवार जाटों का दीर्घकालीन संघर्ष, तथा मुग़ल साम्राज्य के विरुद्ध उनकी सतत् चुनौती — यह सब scholarly fashion में प्रस्तुत है। चूड़ामन जाट, बदन सिंह, सूरज मल — इन क्रमिक नेतृत्व-पुरुषों की कथा एक continuous narrative के रूप में रचित है।
धौलपुर, हाथरस, मुर्सान, बल्लभगढ़ एवं अन्य ऐतिहासिक जाट रियासतों का विवरण भी ग्रंथ में सम्मिलित है। राजा महेन्द्र प्रताप — स्वतंत्रता संग्राम के एक अनूठे योद्धा, जिन्होंने काबुल में निर्वासित अस्थायी सरकार बनाई थी — का व्यक्तित्व विशेष आदर के साथ चित्रित है। 1857 के स्वातंत्र्य समर में जाटों की भूमिका, स्वतंत्रता आन्दोलन में उनका योगदान, चौधरी छोटू राम जैसे किसान-नेता का उत्थान, तथा हरियाणा-पंजाब के राजनीतिक एवं सामाजिक जागरण में जाट समाज की भूमिका — ये सब आधुनिक काल के अध्यायों में आते हैं।
गोत्र-व्यवस्था का खण्ड समाज-शास्त्रीय एवं वंशावली-शोध की दृष्टि से अमूल्य है। प्रमुख जाट गोत्रों — सिनसिनवार, मोर, दलाल, मलिक, हुड्डा, चौटाला, तंवर, कादियान, सहरावत, फोगाट, पूनिया, सिहाग एवं अन्य अनेक — की उत्पत्ति, ऐतिहासिक प्रवास, प्रमुख व्यक्तित्व एवं martial परम्परा का विवरण लेखक ने community records एवं oral histories से संगृहीत कर प्रस्तुत किया है।
लेखक ने अपने अनुसंधान में classical Sanskrit सूत्र, फ़ारसी कालीन chronicles, क्षेत्रीय इतिहास-ग्रंथ, गोत्र-records, बारदोली एवं अन्य स्थानीय परम्पराओं के साक्ष्य, तथा contemporary scholarship — इन सब का व्यापक उपयोग किया है। 1220 पृष्ठों का substantial scope स्वयं इस तथ्य का साक्ष्य है कि जाट इतिहास इतना विस्तृत, इतना consequential एवं इतने काल तक उपेक्षित रहा है कि उसका न्याय करने हेतु इतनी ही बड़ी कृति आवश्यक थी।
भाषा scholarly हिन्दी है, जिसमें संस्कृत-निष्ठ शब्दावली एवं ऐतिहासिक terminology का सम्यक् प्रयोग है। reference-system व्यवस्थित है। ग्रंथ की print-quality विषय की गरिमा के अनुरूप है, जो इसे personal collections, community libraries, academic departments — सभी के लिए एक संग्रहणीय कृति बनाती है।
जाट गृहस्थों, समुदाय-इतिहास के researchers, क्षेत्रीय इतिहास-संग्रहों, भारतीय martial परम्पराओं के विद्यार्थियों, एवं प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो जाट विरासत का authoritative chronicle खोज रहा है — जाट योद्धाओं का इतिहास एक definitive reference है। यह warrior heritage का एक ऐसा अभिलेख है जो scholarship एवं dignity — दोनों के साथ रचा गया है, जैसा कि विषय का गौरव माँग करता है।
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