Vedic Books
Placeholder

Dashapadyunadivritti Sangrah – Set of 2 Books (Sanskrit) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Unadi Sutra Grammar

500.00
30 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
21 - 28 Jul, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

दशपाद्युणादिवृत्तिसंग्रह (2 भागों का समुच्चय) — Dashapadyunadivriti Sangrah, व्याकरणाचार्य पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा सम्पादित यह 604 पृष्ठीय Sanskrit scholarly ग्रंथ-समुच्चय, पाणिनीय व्याकरण-परम्परा के ‘उणादि-सूत्र’ पर आधारित दस प्रमुख classical वृत्तियों (commentaries) का एक comprehensive संकलन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति संस्कृत व्याकरण-शास्त्र के advanced researchers के लिए एक अत्यंत valuable specialized resource है।

**’उणादि-सूत्र’** — पाणिनि के पंच-ग्रंथ-quintet (अष्टाध्यायी, धातु-पाठ, गण-पाठ, उणादि-सूत्र, लिङ्गानुशासन) में से एक — उन विशिष्ट शब्द-निर्माण-नियमों का संग्रह है जो नियमित कृदन्त-तद्धित-प्रक्रियाओं से नहीं, अपितु ‘उण्’ आदि विशेष प्रत्ययों से सिद्ध होते हैं। यह वे शब्द हैं जिनकी व्युत्पत्ति सामान्य grammatical rules से स्पष्ट नहीं होती, अतः उनके लिए विशेष उणादि-सूत्रों की आवश्यकता होती है।

‘दशपाद्’ का शाब्दिक अर्थ है ‘दस पादों वाला’ — यह इंगित करता है कि यह संकलन उणादि-सूत्रों की दस विभिन्न classical व्याख्या-परम्पराओं (वृत्तियों) को एक साथ लाता है, जिससे तुलनात्मक scholarly अध्ययन सम्भव होता है।

ग्रंथ के प्रथम भाग में उणादि-सूत्रों के मूल पाठ के साथ-साथ प्रमुख classical commentators — उज्ज्वलदत्त, स्वामी दयानन्द, तथा अन्य पारम्परिक वृत्तिकारों — के मतों का scholarly संकलन प्रस्तुत है। प्रत्येक उणादि-सूत्र के लिए विभिन्न commentators की व्याख्याओं का parallel presentation, जो researchers को comparative scholarly analysis में सक्षम बनाता है।

**Uzzvaladatta’s commentary** का विशेष विस्तृत विवेचन — यह उणादि-सूत्रों की सर्वाधिक प्रसिद्ध classical व्याख्या है, जिसका systematic exposition ग्रंथ का central content है।

**महर्षि दयानन्द की उणादि-कोश** का भी scholarly संकलन है — महर्षि ने अपनी वेद-भाष्य-रचना के दौरान उणादि-सूत्रों की एक विशिष्ट, वेद-सुसंगत व्याख्या विकसित की, जो पारम्परिक व्याख्याओं से कुछ भिन्न है। यह divergence एवं उसके scholarly कारणों का विवेचन ग्रंथ का एक मूल्यवान अंश है।

द्वितीय भाग में विशिष्ट शब्द-श्रेणियों — जैसे देवता-वाचक शब्द, प्राकृतिक-तत्त्व-वाचक शब्द, गुण-वाचक शब्द — के उणादि-व्युत्पत्ति का detailed case-by-case scholarly exposition है।

पंडित युधिष्ठिर मीमांसक की editorial methodology — जो एक स्वयं प्रखर व्याकरणाचार्य हैं — इस complex comparative material को systematically organized करती है, प्रत्येक वृत्ति के बीच के convergences एवं divergences को स्पष्ट रूप से highlighted करते हुए।

**Historical-linguistic significance** — उणादि-सूत्रों का comparative अध्ययन Sanskrit शब्द-व्युत्पत्ति-विज्ञान (etymology) के historical development को समझने में एक valuable scholarly contribution प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से उन शब्दों के लिए जिनकी व्युत्पत्ति अन्यथा अस्पष्ट रह जाती।

**Vedic-application** — उणादि-सूत्रों का ज्ञान वेद-मन्त्रों के अनेक जटिल शब्दों के authentic अर्थ-निर्धारण के लिए भी आवश्यक है, विशेष रूप से जब महर्षि दयानन्द की वेद-भाष्य-पद्धति का अध्ययन किया जा रहा हो।

604 पृष्ठीय comprehensive आयाम, 2-भागीय संरचना — यह ग्रंथ-समुच्चय उणादि-शास्त्र के comparative-scholarly-study के लिए एक अनिवार्य reference-work है।

Sanskrit के advanced विद्यार्थियों, संस्कृत-shastri एवं आचार्य अभ्यर्थियों, वैदिक gurukulas के advanced acharyas, University Sanskrit departments के postgraduates एवं PhD scholars, comparative Sanskrit-grammar-researchers, आर्य समाज के Vedic-scholars, तथा प्रत्येक उस serious जिज्ञासु के लिए जो उणादि-सूत्रों की classical comparative scholarship में गहराई से enter करना चाहता है — दशपाद्युणादिवृत्तिसंग्रह एक indispensable specialized scholarly resource है।

ग्रंथ के अंत में पंडित मीमांसक ने एक comprehensive comparative-index भी प्रदान की है, जो प्रत्येक उणादि-सूत्र के लिए सभी दस वृत्तियों के मत को एक साथ tabular रूप में प्रस्तुत करती है। यह ready-reference tool researchers के लिए अत्यंत मूल्यवान है, जो किसी specific शब्द की व्युत्पत्ति के सभी classical व्याख्याओं को एक स्थान पर compare करना चाहते हैं। यह systematic organization ग्रंथ को comparative Sanskrit-grammatical-scholarship के क्षेत्र में एक standard reference-work का दर्जा प्रदान करती है।

Enable Notifications OK No thanks