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बृहद् विमानशास्त्र (Brihad Vimanshastra)

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बृहद् विमानशास्त्र (Brihad Vimanshastra), महर्षिभरद्वाजप्रणीत यह 366 पृष्ठीय संस्कृत-हिन्दी ग्रंथ, ‘यन्त्रसर्वस्व’ नामक विशाल ग्रंथ के अंतर्गत आने वाले ‘वैमानिक प्रकरण’ का एक authentic, यतिबोधानन्द-कृत श्लोकबद्ध वृत्ति-सहित संस्करण प्रस्तुत करता है। अमर स्वामी प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित यह कृति स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक (गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार) द्वारा सम्पादित एवं भाषानुवादित है, तथा श्री लाजपत राय अग्रवाल (वैदिक मिशनरी) द्वारा सह-सम्पादित है।

महर्षि भरद्वाज की परम्परा से सम्बद्ध ‘विमानशास्त्र’ भारतीय प्राचीन वाङ्मय की एक अत्यंत चर्चित एवं विचारोत्तेजक कृति है, जो वैमानिकी (aeronautics) से सम्बन्धित विषयों — विमान-निर्माण, उनकी संरचना, उनके संचालन-सिद्धान्त, तथा विभिन्न प्रकार के यानों का शास्त्रीय संस्कृत श्लोकों में वर्णन प्रस्तुत करती है। यह ग्रंथ ‘यन्त्रसर्वस्व’ के बृहत् corpus का एक विशिष्ट अंश है, जो प्राचीन भारतीय यन्त्र-विज्ञान एवं तकनीकी कल्पना की व्यापक परम्परा को दर्शाता है।

इस संस्करण की विशेषता यह है कि मूल श्लोकों के साथ यतिबोधानन्द-कृत एक विस्तृत श्लोकबद्ध वृत्ति (पद्यात्मक टीका) संलग्न है, जो इन सूत्रों की व्याख्या को काव्यात्मक एवं स्मरणीय रूप में प्रस्तुत करती है — यह शैली पारम्परिक संस्कृत टीका-परम्परा के अनुरूप है, जहाँ गद्य के स्थान पर पद्य में व्याख्या रचना एक classical pedagogical तकनीक रही है।

स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक का सम्पादन-कार्य मूल पाठ की shastric प्रामाणिकता को बनाए रखते हुए, आधुनिक हिन्दी-भाषी पाठक के लिए इसे सुगम बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने संस्कृत मूल के साथ-साथ हिन्दी अनुवाद भी प्रस्तुत किया है, जिससे यह ग्रंथ Sanskrit-विद्वानों एवं सामान्य हिन्दी पाठकों — दोनों के लिए सुलभ है।

यह विषय भारतीय बौद्धिक इतिहास में एक सक्रिय एवं बहुआयामी चर्चा का केंद्र रहा है — परम्परागत आस्था-आधारित दृष्टिकोण इसे प्राचीन भारत की उन्नत वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रतीक के रूप में देखता है, जबकि आधुनिक अकादमिक अनुसंधान में इसके रचना-काल, इसके स्रोतों, तथा इसकी ऐतिहासिकता को लेकर विविध विद्वत्तापूर्ण मत प्रस्तुत किए गए हैं। यह संस्करण पाठकों को मूल पाठ एवं उसकी पारम्परिक व्याख्या-परम्परा तक प्रत्यक्ष पहुँच प्रदान करता है, जिससे वे स्वयं इस साहित्य का अध्ययन एवं मूल्यांकन कर सकें।

प्राचीन भारतीय यन्त्र-विज्ञान, संस्कृत वाङ्मय, तथा वैदिक-उत्तरवैदिक साहित्य में रुचि रखने वाले शोधार्थियों, संस्कृत के विद्यार्थियों, तथा प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक एवं तकनीकी कल्पना के इतिहास में जिज्ञासा रखने वाले पाठकों के लिए — बृहद् विमानशास्त्र एक दुर्लभ एवं संग्रहणीय संस्करण है।

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