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Sankhya Darshanam

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Description

Sankhya Darshanam book by Acharya Udayvir Sastri is an authoritative and scholarly exposition of the Sankhya school of Vedic philosophy — one of the six classical darshanas that has profoundly influenced the entire spectrum of Indian philosophical inquiry. सांख्य दर्शनम् हिन्दी में भारतीय षड्दर्शनों में से एक अत्यन्त प्राचीन एवं महत्त्वपूर्ण दर्शन का प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

Sankhya Darshanam Book — सांख्य दर्शन का परिचय

भारतीय दर्शन के छः प्रकारों में से सांख्य भी एक है जो प्राचीन काल में अत्यन्त लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। सांख्य दर्शन का प्रवर्त्तक महर्षि कपिल को माना जाता है। इसका सबसे प्राचीन तथा प्रामाणिक ग्रन्थ सांख्यकारिका है जिसकी रचना ईश्वर कृष्ण ने की थी। ‘सांख्य’ शब्द ‘ख्या’ धातु में ‘सम्’ उपसर्ग लगाकर व्युत्पन्न होता है जिसका अर्थ है — सम्यक् ज्ञान।

यह Sankhya Darshanam book आचार्य उदयवीर शास्त्री की विद्वत्तापूर्ण व्याख्या के साथ सांख्य-सूत्रों का एक सम्पूर्ण एवं प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत करती है। आचार्य जी ने सांख्य के सिद्धान्तों की व्याख्या वेद एवं उपनिषदों के प्रमाणों के आधार पर की है।

सांख्य दर्शनम् हिन्दी — पुरुष एवं प्रकृति का सिद्धान्त

सांख्य दर्शन की मूलभूत अवधारणा पुरुष एवं प्रकृति के बीच का भेद है। सांख्य के अनुसार सम्पूर्ण सृष्टि इन्हीं दो तत्त्वों के सम्मिलन से उत्पन्न होती है। इस सांख्य दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ में पुरुष, प्रकृति, महत्, अहंकार एवं पञ्च तन्मात्राओं के सिद्धान्त का विस्तृत विवेचन किया गया है।

सांख्य दर्शन का भगवद् गीता पर भी गहरा प्रभाव है। गीता का द्वितीय अध्याय ‘सांख्ययोग’ कहलाता है। इस Sankhya Darshanam book में इस सम्बन्ध का भी विवेचन किया गया है।

Sankhya Darshanam Book — दार्शनिक अध्येताओं के लिए

यह Sankhya Darshanam book भारतीय दर्शन के शोधार्थियों, संस्कृत के विद्वानों एवं षड्दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त मूल्यवान है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह सांख्य दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ भारतीय दर्शन की एक महत्त्वपूर्ण शोध-कृति है।

सांख्य दर्शन का प्रभाव न केवल भारतीय दर्शन पर पड़ा, अपितु पाश्चात्य दर्शन में भी इसकी गूँज सुनाई देती है। आधुनिक मनोविज्ञान की अनेक अवधारणाएँ सांख्य के चित्त-सिद्धान्त से मिलती-जुलती हैं। इस Sankhya Darshanam book में इन समानताओं का भी संकेत किया गया है। सांख्य दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। भारतीय दर्शन के प्रत्येक गम्भीर अध्येता के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है।

सांख्य दर्शन में ‘विवेक-ख्याति’ — अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के बीच के भेद का ज्ञान — को ही मोक्ष का मार्ग माना गया है। जब साधक यह जान लेता है कि वह पुरुष है, प्रकृति नहीं — तब उसे मुक्ति मिलती है। यह Sankhya Darshanam book इस गहन तत्त्व को अत्यन्त स्पष्ट एवं विद्वत्तापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। सांख्य दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है। भारतीय दर्शन के प्रत्येक अध्येता के संग्रह में यह ग्रन्थ होना चाहिए।

सांख्य दर्शन का प्रभाव भगवद् गीता के सांख्ययोग अध्याय में स्पष्ट रूप से दिखता है। श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो आत्म-ज्ञान दिया वह सांख्य-सिद्धान्त पर आधारित है। इस Sankhya Darshanam book में सांख्य एवं गीता के इस सम्बन्ध का भी विवेचन है। सांख्य दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।

सांख्य दर्शन का भारतीय चिन्तन पर प्रभाव अत्यन्त व्यापक है। गीता में भी कृष्ण ने सांख्य-दर्शन के अनेक तत्त्वों का उल्लेख किया है। ‘सांख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः’ — सांख्य एवं योग अलग-अलग नहीं, अपितु एक ही सत्य के दो पक्ष हैं। इस Sankhya Darshanam book में इस समन्वय को अत्यन्त स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया गया है। सांख्य दर्शन का त्रिगुण सिद्धान्त — सत्त्व, रज एवं तम — आयुर्वेद, योग एवं सामाजिक दर्शन में भी प्रयुक्त होता है। यह सांख्य दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।

सांख्य दर्शन का प्रभाव भगवद् गीता के सांख्ययोग अध्याय में स्पष्ट रूप से दिखता है। श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो आत्म-ज्ञान दिया वह सांख्य-सिद्धान्त पर आधारित है। इस Sankhya Darshanam book में सांख्य एवं गीता के इस गहरे सम्बन्ध का भी विवेचन है। सांख्य दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है। भारतीय दर्शन के प्रत्येक अध्येता के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है। सांख्य दर्शन का अध्ययन भारतीय दर्शन को समझने के लिए अनिवार्य है। Sankhya Darshanam book vedickarts.com पर उपलब्ध है। सांख्य दर्शनम् हिन्दी पुस्तक भारतीय दर्शन का एक अमूल्य ग्रन्थ है।

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