Prarambhik Rachana Anuvad Kaumudi (प्रारम्भिक रचना अनुवाद कौमुदी)

Description
Prarambhik Rachana Anuvad Kaumudi (प्रारम्भिक रचना अनुवाद कौमुदी) संस्कृत-अध्ययन के आरम्भिक और मध्यवर्ती विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया एक अत्यंत उपयोगी अभ्यास-ग्रंथ है। संस्कृत भाषा का अध्ययन केवल व्याकरण-सूत्रों के स्मरण से पूर्ण नहीं होता; शुद्ध रचना, अर्थानुवाद, वाक्य-विन्यास और सतत अभ्यास के द्वारा ही भाषा में वास्तविक प्रवीणता आती है। यही कारण है कि यह पुस्तक केवल नियम नहीं देती, बल्कि विद्यार्थी को भाषा-प्रयोग की दिशा में सक्रिय रूप से प्रवृत्त करती है।
पुस्तक का उद्देश्य संस्कृत को सरल, सुबोध और सुगम बनाना है। प्रारम्भिक स्तर के विद्यार्थी प्रायः यह अनुभव करते हैं कि व्याकरण समझ लेने के बाद भी वे संस्कृत में शुद्ध वाक्य-रचना, अनुवाद अथवा भाव-प्रकाशन में कठिनाई अनुभव करते हैं। यह ग्रंथ उसी रिक्ति को भरता है। इसमें भाषा-अभ्यास की क्रमबद्ध पद्धति, रचना-प्रशिक्षण की उपयोगिता और मातृभाषा हिंदी से संस्कृत-अभिव्यक्ति की ओर उन्मुख करने वाला अभ्यास-विन्यास निहित है। इसलिए यह पुस्तक संस्कृत-शिक्षण को केवल सैद्धान्तिक न रखकर व्यवहारगत और अभ्यासमूलक बनाती है।
संस्कृत-रचना और अनुवाद दोनों ही शास्त्रीय अध्ययन की आधारभूमि हैं। चाहे विद्यार्थी विद्यालय, महाविद्यालय या पारम्परिक संस्कृत पाठशाला से जुड़ा हो, चाहे वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हो, अथवा स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत सीखना चाहता हो—यह पुस्तक उसके लिए एक सुदृढ़ मार्गदर्शक सिद्ध होती है। हिंदी और संस्कृत के बीच सेतु स्थापित करने की दृष्टि से इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इससे विद्यार्थी अर्थ, वाक्य-रचना और व्यावहारिक प्रयोग के संबंध को स्पष्ट रूप से समझ पाता है।
इस पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष इसका अभ्यास-प्रधान स्वभाव है। भाषा में शुद्धता निरन्तर प्रयत्न से आती है; यह ग्रंथ उसी अनुशासन का संस्कार विकसित करता है। विद्यार्थी इसमें केवल पाठक नहीं रहता, बल्कि साधक की भाँति भाषा के साथ काम करता है—वाक्य बनाता है, रूपों का प्रयोग करता है, अनुवाद करता है और धीरे-धीरे संस्कृत के प्रति आत्मविश्वास प्राप्त करता है। इस दृष्टि से यह ग्रंथ संस्कृत-भाषा के प्रारम्भिक प्रशिक्षण का एक प्रभावी साधन है।
जो पाठक संस्कृत-रचना, सरल अनुवाद, शुद्ध भाषा-अभिव्यक्ति और क्रमबद्ध अभ्यास के माध्यम से अपने ज्ञान को सुदृढ़ करना चाहते हैं, उनके लिए प्रारम्भिक रचना अनुवाद कौमुदी अत्यंत उपयोगी पुस्तक है। यह विद्यार्थियों, अध्यापकों, संस्कृत-प्रेमियों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए समान रूप से लाभकारी है। भाषा-अध्ययन को सुगम, अनुशासित और फलदायी बनाने वाली यह पुस्तक संस्कृत-शिक्षा की आधारभूत आवश्यकताओं को गंभीरता और सरलता के साथ पूरा करती है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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