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Ekadashopanishad (एकादशोपनिषद) — Complete Hindi Translation | Satyavrat Siddhantalankar | 11 Upanishads

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Description

Ekadashopanishad Hindi book by Satyavrat Siddhantalankar is the most accessible and authentic Hindi translation of the eleven principal Upanishads, presented with word-by-word Sanskrit-to-Hindi commentary. एकादशोपनिषद हिन्दी में इन ग्यारह महान् उपनिषदों का सरल, धारावाही एवं सचित्र अनुवाद प्रस्तुत करता है जिससे सामान्य पाठक भी उपनिषदों के गहन तत्त्वों को सहजता से आत्मसात् कर सके।

Ekadashopanishad — उपनिषद् का स्वरूप एवं महत्त्व

जिसमें ब्रह्म का निरूपण पाया जाए उसे उपनिषद् कहते हैं। जैसे भौतिकवादी का भौतिक यथार्थवाद अनुभव के आधार पर खड़ा है, वैसे ही आध्यात्मिकतावादी का आध्यात्म यथार्थवाद की अनुभूति के आधार पर खड़ा है। परम ऋषियों ने तप-समाधि द्वारा जिस मूल कारण तत्त्व ब्रह्म को अनुभूत किया और जिस ब्रह्म को वेदों से जाना उसका गुण-गान उपनिषदों में किया है। उपनिषद् द्वारा प्रतिपादित विद्या सभी मनुष्यों के लिए जानने योग्य है इसमें कोई भेदभाव नहीं है।

इसी भाव को ध्यान में रखते हुए विद्यामार्तण्ड सत्यव्रत सिद्धान्तालङ्कार जी ने प्रमुख ग्यारह उपनिषदों का धारावाही सरल हिन्दी में सचित्र अनुवाद किया है। इस Ekadashopanishad Hindi ग्रन्थ में धारावाही हिन्दी अनुवाद के साथ-साथ एक-एक शब्द का संस्कृत से हिन्दी अर्थ भी दिया गया है जिससे जिज्ञासु पाठक संस्कृत पदों को भी समझ सके।

एकादशोपनिषद हिन्दी — ग्यारह उपनिषदों का परिचय

इस ग्रन्थ में ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक तथा श्वेताश्वतर — इन ग्यारह प्रमुख उपनिषदों का समावेश है। प्रत्येक उपनिषद् अपने आप में एक सम्पूर्ण दार्शनिक ग्रन्थ है जो ब्रह्म, आत्मा, जगत् एवं मोक्ष के सम्बन्ध में वेदों के गहनतम रहस्यों को उद्घाटित करता है।

सत्यव्रत सिद्धान्तालङ्कार जी की अनुवाद-शैली की विशेषता यह है कि वे संस्कृत के दार्शनिक गूढ़ पदों को भी हिन्दी की सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि मूल भाव का कोई हास नहीं होता। उनकी व्याख्या वेदान्त की परम्परागत दृष्टि एवं आर्य समाज की तार्किक पद्धति का एक सुन्दर समन्वय है।

Ekadashopanishad Hindi — अध्येताओं के लिए उपयोगिता

उपनिषदों का अध्ययन भारतीय दर्शन की किसी भी शाखा को समझने के लिए अनिवार्य है। वेदान्त, सांख्य, योग तथा न्याय-वैशेषिक — सभी दर्शन-पद्धतियों का मूल उपनिषदों में ही निहित है। इस एकादशोपनिषद हिन्दी ग्रन्थ को पढ़कर पाठक उस अखण्ड ज्ञान-परम्परा से जुड़ सकते हैं जो सहस्रों वर्षों से भारतीय चिन्तन का आधार रही है।

यह ग्रन्थ संस्कृत के छात्रों, भारतीय दर्शन के अध्येताओं, आध्यात्मिक जिज्ञासुओं तथा आर्य समाज के अनुयायियों — सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Ekadashopanishad Hindi ग्रन्थ प्रत्येक ज्ञान-पिपासु के संग्रह में होना चाहिए।

इस Ekadashopanishad Hindi ग्रन्थ में ईशावास्योपनिषद् से आरम्भ होकर बृहदारण्यकोपनिषद् तक की यात्रा अत्यन्त सुव्यवस्थित एवं क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत की गई है। प्रत्येक उपनिषद् की विशेषता, उसका मुख्य सन्देश एवं उसकी दार्शनिक प्रासंगिकता को लेखक ने संक्षिप्त एवं प्रभावशाली भाषा में प्रकट किया है। उपनिषदों में प्रतिपादित ब्रह्म-विद्या भारतीय दर्शन की सर्वोच्च उपलब्धि है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’, ‘तत्त्वमसि’, ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ — ये महावाक्य सम्पूर्ण उपनिषद् दर्शन के सार हैं। इस एकादशोपनिषद हिन्दी ग्रन्थ में इन महावाक्यों की व्याख्या अत्यन्त स्पष्ट एवं सुगम रीति से की गई है जिससे पाठक उपनिषद् के परम सत्य को अपनी बुद्धि से ग्रहण कर सके। सत्यव्रत सिद्धान्तालङ्कार जी की यह कृति उन साधकों के लिए विशेष मूल्यवान है जो संस्कृत नहीं जानते किन्तु उपनिषदों के तत्त्वज्ञान को उनके मूल स्वरूप में समझना चाहते हैं। यह Ekadashopanishad Hindi ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है और भारतीय दर्शन के प्रत्येक जिज्ञासु के संग्रह में होना चाहिए।

आधुनिक युग में जब पाश्चात्य दर्शन एवं भौतिकवाद की प्रधानता है, उस समय में उपनिषदों का सन्देश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उपनिषद् यह सिखाते हैं कि बाह्य भौतिक सफलता से परे एक आन्तरिक आनन्द एवं शान्ति है जो ब्रह्म-साक्षात्कार से प्राप्त होती है। इस एकादशोपनिषद हिन्दी ग्रन्थ के माध्यम से पाठक उस आन्तरिक यात्रा पर निकल सकते हैं जो भारतीय ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व प्रशस्त की थी। Ekadashopanishad Hindi का यह संस्करण संस्कृत-ज्ञान के बिना भी उपनिषदों की गहराई तक पहुँचने का एक सुलभ एवं प्रामाणिक माध्यम है।

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