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Yajurveda

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Description

Yajurveda book by Swami Dayanand Saraswati is an authoritative edition of the second of the four Vedas — presenting the sacred knowledge of yajnas, spiritual science, and cosmic wisdom that forms the bedrock of Vedic civilisation. यजुर्वेद हिन्दी में स्वामी दयानन्द सरस्वती के प्रामाणिक भाष्य सहित यजुर्वेद का एक सम्पूर्ण संस्करण है जो वेद-जिज्ञासुओं के लिए अनिवार्य है।

Yajurveda Book — यजुर्वेद का स्वरूप एवं महत्त्व

चार वेदों में यजुर्वेद द्वितीय वेद है। कर्मकाण्ड प्रधान इस वेद में जहाँ यज्ञों और यज्ञ के विधानों का वर्णन है, वहीं ज्ञान-विज्ञान, आत्मा-परमात्मा तथा समाजोपयोगी सम्पूर्ण ज्ञान भी है। आर्यों की बुनियाद वेदों के ज्ञान पर टिकी है। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि समय के साथ हर चीज़ बदलती है किन्तु वेदों का ज्ञान शाश्वत एवं अपरिवर्तनीय है।

इस Yajurveda book में स्वामी दयानन्द सरस्वती के प्रामाणिक भाष्य के साथ यजुर्वेद के मन्त्रों का संस्कृत पाठ एवं हिन्दी अनुवाद दिया गया है। यजुर्वेद में यज्ञ के मन्त्रों के साथ-साथ ईश्वर-उपासना, सामाजिक व्यवस्था एवं आत्म-ज्ञान के महत्त्वपूर्ण विषय हैं। इस यजुर्वेद हिन्दी ग्रन्थ को पढ़कर पाठक वैदिक कर्मकाण्ड एवं ज्ञान-काण्ड दोनों का समन्वित बोध प्राप्त कर सकते हैं।

यजुर्वेद हिन्दी — स्वामी दयानन्द का भाष्य

स्वामी दयानन्द सरस्वती के यजुर्वेद भाष्य की विशेषता यह है कि उन्होंने प्रत्येक मन्त्र की व्याख्या पाणिनीय व्याकरण एवं यास्काचार्य की निरुक्त-पद्धति के आधार पर की है। इससे यजुर्वेद के मन्त्रों का वास्तविक वैदिक अर्थ प्रकट होता है। यह Yajurveda book महर्षि दयानन्द की वेद-व्याख्या की महान् परम्परा का एक अनमोल उदाहरण है।

यजुर्वेद के 40 अध्यायों में 1975 मन्त्र हैं। इनमें ईशोपनिषद् भी सम्मिलित है जो भारतीय दर्शन की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपनिषद् है। महर्षि दयानन्द ने यजुर्वेद की व्याख्या में यह सिद्ध किया कि यजुर्वेद केवल कर्मकाण्ड का ग्रन्थ नहीं अपितु यह एक सम्पूर्ण जीवन-दर्शन है।

Yajurveda Book — वेद-जिज्ञासुओं के लिए

यह Yajurveda book वेद-प्रेमियों, संस्कृत के अध्येताओं, आर्य समाज के अनुयायियों एवं वैदिक धर्म के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त मूल्यवान है। यजुर्वेद में निहित यज्ञ-विज्ञान, आत्म-ज्ञान एवं समाज-दर्शन को समझने के लिए यह एकमात्र प्रामाणिक माध्यम है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह यजुर्वेद हिन्दी ग्रन्थ वैदिक साहित्य का एक अनिवार्य संसाधन है।

यजुर्वेद के प्रमुख विषयों में अग्निहोत्र, दर्शपूर्णमास, राजसूय, अश्वमेध एवं अन्य वैदिक यज्ञों की विधि का विस्तृत वर्णन है। इन यज्ञों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु वायुमण्डल-शुद्धि, स्वास्थ्य-लाभ एवं सामाजिक एकता को प्रोत्साहित करना भी है। स्वामी दयानन्द ने इस Yajurveda book में इन यज्ञों के वैज्ञानिक पक्ष को भी उजागर किया है। यजुर्वेद हिन्दी में इस प्रामाणिक व्याख्या को पढ़कर पाठक वेद के कर्मकाण्ड को उसके वास्तविक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक सन्दर्भ में समझ सकते हैं। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Yajurveda book वेद-साहित्य का एक अनिवार्य अंग है।

यजुर्वेद की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें ईशोपनिषद् सम्मिलित है जो ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ से प्रारम्भ होती है। यह उपनिषद् ब्रह्म-विद्या का एक अत्यन्त संक्षिप्त किन्तु गहन प्रतिपादन है। स्वामी दयानन्द ने इस Yajurveda book में ईशोपनिषद् की भी प्रामाणिक व्याख्या की है। यजुर्वेद का अध्ययन करने से साधक को कर्म, ज्ञान एवं उपासना के त्रिविध मार्ग की एक समग्र दृष्टि प्राप्त होती है। महर्षि दयानन्द की यजुर्वेद-व्याख्या में यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु एक वैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया गया है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह यजुर्वेद हिन्दी ग्रन्थ प्रत्येक वेद-प्रेमी के लिए अनिवार्य है।

यजुर्वेद में ईशोपनिषद् का समावेश इसे विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बनाता है। ईशोपनिषद् के 18 मन्त्रों में ब्रह्म-विद्या का सार समाहित है। स्वामी दयानन्द ने ईशोपनिषद् की जो व्याख्या की है वह भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में अद्वितीय है। यजुर्वेद के मन्त्र यज्ञ की अग्नि के समान हैं — वे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं और साधक के मन को निर्मल बनाते हैं। इस Yajurveda book में प्रत्येक मन्त्र के पाठ-विधान एवं उसके भावार्थ का भी विवरण है। आर्य समाज की परम्परा में यजुर्वेद के मन्त्रों का नित्य पाठ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। वेद-मन्त्रों की शुद्ध उच्चारण-विधि भी इस यजुर्वेद हिन्दी ग्रन्थ में दी गई है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Yajurveda book प्रत्येक वेद-अध्येता के लिए अनिवार्य है।

यजुर्वेद में वर्णित यज्ञ-विज्ञान आधुनिक पर्यावरण-विज्ञान से भी जुड़ता है। हवन में प्रयुक्त घृत एवं औषधीय जड़ी-बूटियों का धुआँ वायुमण्डल को शुद्ध करता है। महर्षि दयानन्द ने इस Yajurveda book में यज्ञ के इस वैज्ञानिक पक्ष को भी प्रतिपादित किया है। यजुर्वेद का अध्ययन करने से साधक को कर्म, ज्ञान एवं उपासना के त्रिविध मार्ग की समग्र दृष्टि प्राप्त होती है। यजुर्वेद हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।

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