Arya Samaj | Lala Lajpat Rai | आर्य समाज हिन्दी पुस्तक | Swami Dayananda Saraswati History

Description
Arya Samaj Hindi book by Lala Lajpat Rai is a landmark work that presents the history, philosophy, and social impact of the Arya Samaj movement from the perspective of one of India’s greatest nationalist leaders. लाला लाजपत राय द्वारा रचित यह आर्य समाज हिन्दी पुस्तक वैदिक धर्म के पुनरुत्थान एवं भारतीय समाज-सुधार के इतिहास का एक अत्यन्त प्रामाणिक एवं जीवन्त विवरण है जो vedickarts.com पर उपलब्ध है।
Arya Samaj Hindi Book — आर्य समाज की स्थापना एवं पृष्ठभूमि
भारतीय धार्मिक एवं सामाजिक नवजागरण के इतिहास में स्वामी दयानन्द सरस्वती और उनके द्वारा स्थापित आर्य समाज का योगदान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं दूरगामी है। सन् 1875 में बम्बई में स्थापित आर्य समाज ने वैदिक धर्म को उसके मूल, शुद्ध एवं तर्कसम्मत स्वरूप में पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया। इसका उद्देश्य वैदिक धर्म को पुनः शुद्ध रूप से स्थापित करना, भारत को धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक रूप से एक सूत्र में बाँधना एवं पाश्चात्य प्रभाव का सामना करना था।
स्वामी दयानन्द सरस्वती का जीवन स्वयं में एक असाधारण साधना-यात्रा है। सन् 1824 में गुजरात के मौरवी में जन्मे मूलशंकर ने 21 वर्ष की अवस्था में गृह-त्याग कर संन्यस्त जीवन अपनाया। दण्डी स्वामी पूर्णानन्द से संन्यास-दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात् वे ‘स्वामी दयानन्द सरस्वती’ के नाम से प्रख्यात हुए। सन् 1861 में वेदों की दार्शनिक व्याख्या से साक्षात्कार के पश्चात् उनका जीवन सम्पूर्णतः वैदिक पुनरुत्थान को समर्पित हो गया।
लाला लाजपत राय — आर्य समाज दर्शन एवं सामाजिक सुधार
इस Arya Samaj Hindi book में लाला लाजपत राय ने आर्य समाज की स्थापना की पृष्ठभूमि, उसके मूल उद्देश्यों एवं सिद्धान्तों का गहन विश्लेषण किया है। वेदों और भारतीय दर्शन के गहन अध्ययन के बाद स्वामी जी ने यह निष्कर्ष निकाला कि आर्य श्रेष्ठ हैं, वेद ही ईश्वरीय ज्ञान है तथा भारत भूमि ही श्रेष्ठ है। इस वैचारिक आधार पर उन्होंने एक सम्पूर्ण धार्मिक आन्दोलन खड़ा किया।
आर्य समाज का उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार तक सीमित नहीं था। यह आन्दोलन भारत को धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक दृष्टि से एक सूत्र में बाँधने का महत्त्वाकांक्षी प्रयास था। स्त्री-शिक्षा, जातिभेद-निवारण, विधवा-विवाह का समर्थन, बाल-विवाह का विरोध तथा हिन्दी एवं संस्कृत के प्रचार-प्रसार में आर्य समाज का योगदान अविस्मरणीय है।
लाला लाजपत राय स्वयं आर्य समाज के प्रभाव से निर्मित एक महान् राष्ट्रभक्त नेता थे। अतः यह आर्य समाज हिन्दी पुस्तक एक आन्तरिक दृष्टि से लिखा गया इतिहास है — एक ऐसे लेखक की कलम से जो आर्य समाज के आदर्शों को जीवन में उतार चुके थे। यह ग्रन्थ हिन्दी पाठकों के लिए आर्य समाज को समझने का सबसे प्रामाणिक एवं सुलभ स्रोत है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Arya Samaj Hindi book आर्य समाज के इतिहास एवं दर्शन के प्रत्येक जिज्ञासु के लिए संग्रहणीय है।
इस Arya Samaj Hindi book में लाला लाजपत राय ने आर्य समाज के शैक्षणिक योगदान का भी विस्तार से उल्लेख किया है। गुरुकुल-पद्धति का पुनरुत्थान, दयानन्द ऐंग्लो-वैदिक विद्यालयों की स्थापना तथा राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत शिक्षा-व्यवस्था का निर्माण — ये सभी आर्य समाज के वे योगदान हैं जिन्होंने भारत के स्वतन्त्रता-संग्राम की वैचारिक नींव तैयार की।
यह आर्य समाज हिन्दी पुस्तक इस तथ्य को भी रेखांकित करती है कि आर्य समाज ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में अभूतपूर्व योगदान दिया। हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास में आर्य समाज की भूमिका ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
लाला लाजपत राय की दृष्टि में आर्य समाज केवल एक धार्मिक संस्था नहीं थी, यह एक राष्ट्रनिर्माण आन्दोलन था।
Arya Samaj Hindi Book — राष्ट्र-निर्माण में आर्य समाज का योगदान
इस Arya Samaj Hindi book को पढ़कर पाठक यह समझ सकते हैं कि किस प्रकार धर्म-सुधार एवं राष्ट्र-जागरण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। vedickarts.com पर उपलब्ध यह ग्रन्थ भारतीय इतिहास के प्रत्येक जिज्ञासु के लिए अनिवार्य पठन है।
इस Arya Samaj Hindi book को पढ़कर पाठक यह भी समझ सकते हैं कि भारत का स्वतन्त्रता-संग्राम केवल राजनीतिक नहीं था। इसकी जड़ें धर्म, संस्कृति एवं आत्मसम्मान की उस चेतना में थीं जिसे आर्य समाज ने जागृत किया। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक एवं अन्य राष्ट्रनायकों पर आर्य समाज के वैचारिक प्रभाव को यह ग्रन्थ अत्यन्त स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। vedickarts.com पर यह आर्य समाज हिन्दी पुस्तक प्रत्येक इतिहास-प्रेमी के लिए उपलब्ध है।
यह Arya Samaj Hindi book न केवल इतिहास का एक प्रामाणिक विवरण है, अपितु यह आज के भारतीय नागरिक के लिए भी एक प्रेरणा-स्रोत है। लाला लाजपत राय की लेखनी में वह ओज एवं निष्ठा है जो पाठक को तुरन्त आकृष्ट करती है। आर्य समाज के दर्शन एवं इतिहास को समझने के लिए यह आर्य समाज हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर सुलभ है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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