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भर्तृहरि शतकम (नीति-शृंगार-वैराग्य) | Bhartrihari Shatakam Hindi-Sanskrit

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Description

“भर्तृहरि शतकम” संस्कृत साहित्य की एक अमूल्य काव्य निधि है, जिसमें महान संस्कृत कवि और दार्शनिक भर्तृहरि द्वारा रचित उपदेशात्मक श्लोकों का संग्रह प्रस्तुत किया गया है। भर्तृहरि भारतीय काव्य परंपरा में एक नीतिकार और दार्शनिक चिंतक के रूप में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा रचित शतकत्रय — अर्थात् नीति शतक, शृंगार शतक और वैराग्य शतक — भारतीय चिंतन, नैतिक जीवन और आध्यात्मिक उन्नति के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।

इन तीनों शतकों में सौ-सौ श्लोक हैं, जो जीवन के विविध आयामों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करते हैं। नीति शतक में धर्म, नैतिकता, आचरण और सामाजिक जीवन से संबंधित उपदेश दिए गए हैं। शृंगार शतक में प्रेम, सौंदर्य और मानवीय भावनाओं के सूक्ष्म पक्षों का काव्यमय वर्णन मिलता है। वहीं वैराग्य शतक में संसार की अस्थिरता और आध्यात्मिक विरक्ति का गहन दर्शन प्रस्तुत किया गया है।

भर्तृहरि का साहित्य केवल काव्यात्मक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के यथार्थ अनुभवों और मानव मन के द्वंद्व को भी उजागर करता है। उनके श्लोकों में सांसारिक आकर्षण और मोक्ष की आकांक्षा के बीच के संघर्ष का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण मिलता है। यह विशेषता उनके काव्य को केवल साहित्यिक कृति न बनाकर एक दार्शनिक मार्गदर्शिका भी बनाती है।

संस्कृत साहित्य और दर्शन में भर्तृहरि का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे एक महान भाषाविद्, दार्शनिक और कवि थे, जिनकी रचनाएँ भाषा, विचार और आध्यात्मिकता के गहन संबंध को प्रकट करती हैं। उनका दर्शन “शब्द ब्रह्म” की अवधारणा पर आधारित था, जिसके अनुसार भाषा और चेतना का गहरा संबंध है।

यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो संस्कृत साहित्य, भारतीय दर्शन और नैतिक जीवन के सिद्धांतों को सरल रूप में समझना चाहते हैं। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, साहित्य-प्रेमियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए यह एक प्रेरणादायक ग्रंथ है।

समग्र रूप से, भर्तृहरि शतकम केवल काव्य का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के सत्य, नैतिकता और आत्मज्ञान की ओर मार्गदर्शन करने वाली एक अमूल्य वैचारिक धरोहर है। इसके अध्ययन से पाठक भारतीय चिंतन की गहराई और संस्कृत साहित्य की उत्कृष्टता का अनुभव कर सकते हैं।

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