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Gokarudanidhi(गोकरुणानिधि ) स्वामी दयानन्द सरस्वती

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Description

भारत भूमि में गाय की महिमा आदिकाल से रही है। हर आर्य घर में सबसे पहली रोटी गाय की और दूसरी रोटी कुत्ते की निकाली जाती थी। घर में बनने वाली पहली रोटी गायों को खिलाकर ही परिवार स्वयं कुछ खाता था। कड़वा है, लेकिन सच है कि आज सड़कों पर आवारा घूमती व भूखी गाय कचरे से गंदगी व पॉलिथीन खाने को मजबूर हैं। सुख-समृद्धि की प्रतीक रही भारतीय गाय आज कूड़े के ढेर में कचरा और प्लास्टिक की थैलियां खाती दिखती हैं। मां के दर्जे वाली गाय की दुर्दशा बढ़ती जा रही है। आर्य समाज के संस्थापक, आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज-सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती ‘गौ करुणानिधि’ में कहते हैं कि गाय मनुष्य के लिए अत्यंत मूल्यवान है और गाय का दूध पौष्टिक तथा घी और दही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। गाय का दूध मां के दूध के गुण के समतुल्य होता है। गाय के दूध में संपूर्ण पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। ‘गौ करुणानिधि’ नामक पुस्तक में महर्षि दयानंद ने गाय के अनेक लाभों को दर्शाया। गाय जीवनोपयोगी, अतुलनीय तथा लाभकारी पशु है। महर्षि दयानंद ने गौरक्षा को एक अत्यंत उपयोगी और राष्ट्र के लिए लाभदायक पशु मानकर उसकी रक्षा का संदेश दिया था।

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