Arya Samaj ke 10 Niyam ki Vyakhya (आर्य समाज के 10 नियमों की व्याख्या) | Acharya Brahmachari Nandkishor

Description
Arya Samaj 10 Niyam is the philosophical and ethical foundation upon which Maharshi Dayananda Saraswati built one of the most influential reform movements in Indian history. This authoritative commentary on आर्य समाज नियम हिन्दी by Acharya Brahmachari Nandkishor presents a detailed Veda-based interpretation of all ten principles that guide Arya Samaj thought and practice. Available at vedickarts.com, this is an essential text for every follower of Vedic dharma.
Arya Samaj 10 Niyam — दस नियमों का दार्शनिक आधार
आर्य समाज के दस नियम केवल धार्मिक आचार-संहिता नहीं हैं, अपितु ये एक सम्पूर्ण जीवन-दर्शन को प्रतिध्वनित करते हैं — ऐसा दर्शन जो ईश्वर, जीव, जगत् तथा मनुष्य के सामाजिक दायित्वों के बीच एक सन्तुलित एवं तार्किक सम्बन्ध स्थापित करता है। इस Arya Samaj 10 Niyam व्याख्या-ग्रन्थ में प्रत्येक नियम का वेद, उपनिषद् एवं महर्षि दयानन्द के ग्रन्थों के उद्धरणों से पुष्ट विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
आर्य समाज नियम हिन्दी — प्रथम से पञ्चम नियम की व्याख्या
प्रथम नियम में यह प्रतिपादित किया गया है कि सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उन सबका आदिमूल परमेश्वर है। यह नियम आर्य समाज के ईश्वरवादी एवं वेदाधारित ज्ञान-दर्शन का केन्द्रबिन्दु है। द्वितीय नियम में ईश्वर के स्वरूप का वर्णन सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी एवं सृष्टिकर्ता के रूप में किया गया है — जो पौराणिक सगुण-उपासना के विरुद्ध एक तार्किक शुद्ध एकेश्वरवादी मत है।
तृतीय नियम वेद की सर्वोच्च प्रामाणिकता घोषित करता है और समस्त आर्यजनों के लिए वेद का पठन-पाठन परम धर्म बताता है। इस आर्य समाज नियम हिन्दी विवेचन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वेद-पठन का अधिकार जाति, वर्ण या लिंग पर आधारित नहीं है — यह एक क्रान्तिकारी वैचारिक दृष्टिकोण था।
चतुर्थ एवं पञ्चम नियम सत्य-ग्रहण एवं असत्य-त्याग के प्रति निरन्तर उद्यत रहने तथा समस्त कार्य धर्मानुसार करने का निर्देश देते हैं। षष्ठ नियम समाज के उपकार को शारीरिक, आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति के रूप में आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य घोषित करता है जो इस Arya Samaj 10 Niyam आन्दोलन के सामाजिक सुधारवादी चरित्र को स्पष्ट करता है।
Arya Samaj 10 Niyam — षष्ठ से दशम नियम एवं सामाजिक दर्शन
सप्तम से दशम नियम तक प्रेम, धर्म, अविद्या-नाश, सामूहिक उन्नति एवं सामाजिक नियमों के पालन पर बल दिया गया है। दशम नियम स्पष्ट करता है कि सामाजिक एवं सर्वहितकारी नियमों के पालन में सबको परतन्त्र रहना चाहिए किन्तु प्रत्येक हितकारी नियम पालने में सब स्वतन्त्र रहें — यह व्यक्तिगत स्वतन्त्रता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का एक अद्भुत समन्वय है।
आचार्य नन्दकिशोर ने इस आर्य समाज नियम हिन्दी ग्रन्थ में प्रत्येक नियम को वेदों एवं महर्षि दयानन्द के दर्शन से जोड़ा है। यह Arya Samaj 10 Niyam ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है और आर्य समाज के अनुयायियों, वैदिक दर्शन के अध्येताओं एवं भारतीय धार्मिक आन्दोलनों के शोधार्थियों के लिए अनिवार्य पठन सामग्री है।
आचार्य ब्रह्मचारी नन्दकिशोर ने इस Arya Samaj 10 Niyam व्याख्या-ग्रन्थ में यह भी स्पष्ट किया है कि ये दस नियम केवल आर्य समाज के सदस्यों के लिए नहीं, अपितु समस्त मनुष्यजाति के कल्याण के लिए हैं। महर्षि दयानन्द की दृष्टि में धर्म का अर्थ मनुष्यमात्र के लिए कल्याणकारी नियमों का पालन है — किसी सम्प्रदाय-विशेष की रूढ़ियों का अनुकरण नहीं।
इस आर्य समाज नियम हिन्दी ग्रन्थ में यह भी बताया गया है कि इन नियमों को अपने जीवन में किस प्रकार उतारा जाए। सैद्धान्तिक व्याख्या के साथ-साथ व्यावहारिक मार्गदर्शन इस पुस्तक को एक जीवन्त एवं उपयोगी ग्रन्थ बनाता है। आर्य समाज के साप्ताहिक सत्संग एवं हवन में इन नियमों के पाठ एवं व्याख्या की परम्परा है और यह पुस्तक उस परम्परा को समृद्ध करती है।
Arya Samaj 10 Niyam की यह व्याख्या आज के युग में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 19वीं शताब्दी में थी। नैतिक मूल्यों की गिरावट, सामाजिक असमानता एवं आध्यात्मिक भटकाव के इस दौर में ये दस नियम एक स्पष्ट एवं तर्कसंगत जीवन-दर्शन प्रदान करते हैं। यह आर्य समाज नियम हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
Arya Samaj 10 Niyam का यह व्याख्यान ग्रन्थ इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि यह बच्चों एवं युवाओं को आर्य समाज के मूल सिद्धान्तों से परिचित कराने के लिए आदर्श पाठ्यसामग्री है। आर्य समाज के विद्यालयों, गुरुकुलों एवं बाल-संस्कार कार्यक्रमों में इस आर्य समाज नियम हिन्दी पुस्तक का उपयोग शिक्षकों एवं अभिभावकों द्वारा किया जा सकता है। इससे नई पीढ़ी में वैदिक मूल्यों की स्थापना में सहायता मिलती है।
Arya Samaj 10 Niyam पर केन्द्रित यह व्याख्या-ग्रन्थ आर्य समाज के प्रत्येक अनुयायी के लिए एक अनिवार्य पारायण है। आर्य समाज की शाखाओं, विद्यालयों एवं परिवारों में इस आर्य समाज नियम हिन्दी पुस्तक का नियमित अध्ययन वैदिक संस्कारों को जीवित रखने में सहायक है। इसे आज ही vedickarts.com से मँगाएँ।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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