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Sanskar Samuchchay (संस्कार समुच्चय) — Pandit Madanmohan Vidyasagar | 16 Vedic Samskaras Complete Guide

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Description

Sanskar Samuchchay book by Pandit Madanmohan Vidyasagar is a comprehensive and authoritative guide to the sixteen Vedic samskaras that form the sacred foundation of the Indian dharmic life-cycle. संस्कार समुच्चय हिन्दी में वैदिक सोलह संस्कारों की विधि, उनके दार्शनिक महत्त्व एवं जीवन में उनकी प्रासंगिकता का एक प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

Sanskar Samuchchay — संस्कारों का वैदिक महत्त्व

लोहा, चाँदी आदि धातुएँ तपाने से शुद्ध होती हैं, संस्कारित करने से सुन्दर दिखती हैं, भाषा को संस्कारित कर बोलने से उसके अधिक गुण प्रदर्शित होते हैं — उसी प्रकार मनुष्य भी संस्कारों से उत्कृष्ट बनता है। मनुष्य को संस्कारित एवं उत्कृष्ट बनाने के लिए हमारे ऋषियों ने सोलह संस्कारों का विधान किया। ये संस्कार गर्भाधान से आरम्भ होकर अन्त्येष्टि तक मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन को आवृत्त करते हैं।

धीरे-धीरे अनेक बाहरी आक्रमणों और दूसरी संस्कृतियों के प्रभाव में ये संस्कार छूटते चले गए। महर्षि दयानन्द ने ‘संस्कार विधि’ नामक ग्रन्थ में प्राचीन आर्ष ग्रन्थों — गृह्यसूत्र आदि — के वचन उद्धृत कर सोलह संस्कारों की विधि और परिचय प्रस्तुत किया था। इस Sanskar Samuchchay book में उसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए संस्कारों का विस्तृत एवं व्यावहारिक विवेचन किया गया है।

संस्कार समुच्चय हिन्दी — सोलह संस्कारों का विस्तृत विवरण

इस संस्कार समुच्चय हिन्दी ग्रन्थ में गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूडाकर्म, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, समावर्तन, विवाह एवं अन्त्येष्टि — इन सभी संस्कारों का मन्त्र-सहित विधान, उनका अर्थ एवं महत्त्व समझाया गया है।

प्रत्येक संस्कार के पीछे जो वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि है उसे भी लेखक ने सुस्पष्ट किया है। संस्कारों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु मनुष्य के शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास के लिए एक सुव्यवस्थित जीवन-पद्धति का निर्माण करना है।

Sanskar Samuchchay Book — परिवारों एवं संस्कार-संचालकों के लिए उपयोगिता

यह Sanskar Samuchchay book आर्य समाज के पुरोहितों, संस्कार-संचालकों, अभिभावकों एवं वैदिक जीवन-पद्धति में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए एक अत्यन्त उपयोगी सन्दर्भ-ग्रन्थ है। गुरुकुलों एवं विद्यालयों में भी यह पुस्तक संस्कार-शिक्षा के लिए आदर्श सामग्री है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह संस्कार समुच्चय हिन्दी ग्रन्थ वैदिक संस्कृति के पुनरुत्थान में एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।

इस Sanskar Samuchchay book में यह भी बताया गया है कि आधुनिक युग में इन सोलह संस्कारों को किस प्रकार व्यावहारिक रूप दिया जाए। शहरी जीवन में जहाँ पुरोहित की सुलभता हमेशा सम्भव नहीं, वहाँ परिवार के मुखिया स्वयं किस प्रकार संस्कार-कार्य सम्पन्न कर सकते हैं — इसका भी मार्गदर्शन इस ग्रन्थ में मिलता है। संस्कार समुच्चय हिन्दी पुस्तक में प्रत्येक संस्कार के मन्त्रों का हिन्दी अर्थ भी दिया गया है जिससे संस्कार के अवसर पर सभी उपस्थित जन उसका भावार्थ समझ सकें। यह Sanskar Samuchchay book vedickarts.com पर उपलब्ध है और प्रत्येक वैदिक परिवार के लिए एक अनिवार्य ग्रन्थ है।

सोलह संस्कारों में से उपनयन संस्कार विशेष महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह विद्यारम्भ एवं गुरु-शिष्य परम्परा की नींव रखता है। इसी प्रकार विवाह-संस्कार भी एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एवं जीवन-परिवर्तक संस्कार है जिसकी विधि एवं मन्त्रों का विस्तृत विवेचन इस Sanskar Samuchchay book में मिलता है। यह संस्कार समुच्चय हिन्दी पुस्तक आर्य समाज की संस्कार-परम्परा को जीवित रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है। vedickarts.com से आज ही मँगाएँ।

वैदिक संस्कारों की परम्परा भारतीय सभ्यता की सबसे अमूल्य धरोहर है। जब एक शिशु इस संसार में आता है तो जातकर्म एवं नामकरण संस्कार उसके जीवन की पवित्र शुरुआत का उत्सव मनाते हैं। जब वह युवा होता है तो उपनयन संस्कार उसे ज्ञान-मार्ग पर अग्रसर करता है। इस Sanskar Samuchchay book के माध्यम से इन सभी पवित्र अनुष्ठानों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह संस्कार समुच्चय हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। इस पुस्तक को पढ़कर प्रत्येक पाठक वैदिक संस्कारों की गहराई को समझ सकता है और अपने परिवार में इन्हें पुनर्जीवित कर सकता है। यह Sanskar Samuchchay book संस्कार-परम्परा के पुनरुत्थान का एक सराहनीय प्रयास है।

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