Satyarth Prakash Big Type (सत्यार्थ प्रकाश स्थूलाक्षरी) — Swami Dayananda Saraswati | Large Print Edition

Description
Satyarth Prakash Hindi big type edition is the large-print version of Maharshi Dayananda Saraswati’s most celebrated and influential work — a book that transformed Indian religious thought and laid the intellectual foundation of the Arya Samaj movement. सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी का यह स्थूलाक्षरी संस्करण वृद्धजनों, दृष्टि-बाधितों एवं गम्भीर पाठकों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
Satyarth Prakash Hindi — ग्रन्थ की रचना-पृष्ठभूमि
आदि सृष्टि में ईश्वर द्वारा मनुष्यों को मार्गदर्शन हेतु वेदों का ज्ञान दिया गया। उसी ज्ञान के आधार पर मनुष्यों ने अपनी व्यवस्थाओं और कर्तव्यों का निर्धारण किया। लगभग महाभारत काल तक कुपरम्पराएँ और कुसंस्कारों का अधिक प्रभाव न था किन्तु महाभारत काल से कुसंस्कारों के बीज पल्लवित होने लगे। आर्यावर्त की दुर्दशा हुई, अन्धविश्वास, विदेशी आक्रमण, मतान्तरण आदि दोषों का प्रकोप होने लगा। स्त्री और शूद्रों की दयनीय दशा आरम्भ हुई। वेदों के सच्चार्थ का लोप हो गया।
इस भयंकर परिस्थिति में मानव-कल्याण के उद्देश्य से समय-समय पर महापुरुषों का प्रादुर्भाव हुआ जिनमें स्वामी दयानन्द जी सरस्वती सर्वोच्च स्थान रखते हैं। स्वामी दयानन्द जी ने समाज-सुधार और वेदों की पुनः प्रतिष्ठा के उद्देश्य से सत्यार्थ प्रकाश की रचना की। यह Satyarth Prakash Hindi ग्रन्थ वैदिक धर्म के पुनरुत्थान का सबसे शक्तिशाली एवं प्रभावशाली दस्तावेज है।
सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी — ग्रन्थ की विषय-वस्तु एवं संरचना
सत्यार्थ प्रकाश के चौदह समुल्लासों में ईश्वर के स्वरूप, वेदों की प्रामाणिकता, शिक्षा-पद्धति, गृहस्थ-धर्म, राजधर्म, मोक्ष-विज्ञान तथा विभिन्न मत-मतान्तरों की समीक्षा जैसे विषयों का तर्कपूर्ण विवेचन है। लेखक ने प्रत्येक विषय को वेद एवं युक्ति के आधार पर प्रस्तुत किया है — न किसी पूर्वाग्रह से और न किसी सम्प्रदाय-विशेष के प्रति पक्षपात से।
इस Satyarth Prakash Hindi स्थूलाक्षरी संस्करण की विशेषता यह है कि बड़े अक्षरों में मुद्रित होने के कारण इसे पढ़ना अत्यन्त सुगम है। वृद्धजन जिन्हें सामान्य मुद्रण पढ़ने में कठिनाई होती है, वे भी इस संस्करण से सत्यार्थ प्रकाश का लाभ उठा सकते हैं।
Satyarth Prakash Hindi — आर्य समाज एवं वैदिक धर्म का आधारग्रन्थ
सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी का अध्ययन किए बिना आर्य समाज के दर्शन को पूर्णतः समझा नहीं जा सकता। यह ग्रन्थ न केवल धार्मिक अपितु सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Satyarth Prakash Hindi बड़े अक्षरों का संस्करण आर्य समाज के प्रत्येक अनुयायी एवं वैदिक धर्म के जिज्ञासु के लिए अनिवार्य है।
सत्यार्थ प्रकाश के चौदह समुल्लासों में स्वामी दयानन्द ने जो तर्कपूर्ण एवं निर्भीक विवेचन किया है वह भारतीय धार्मिक साहित्य में अद्वितीय है। उन्होंने पौराणिक मान्यताओं, जादू-टोने, मूर्तिपूजा एवं अन्य अन्धविश्वासों की तीव्र आलोचना वेद एवं युक्ति के आधार पर की। साथ ही उन्होंने ईसाई एवं इस्लाम मतों का भी निष्पक्ष समीक्षण किया। इस Satyarth Prakash Hindi स्थूलाक्षरी संस्करण का विशेष लाभ यह है कि जो वृद्धजन वर्षों से इस ग्रन्थ को पढ़ना चाहते थे किन्तु सामान्य मुद्रण की छोटी लिखावट के कारण पढ़ नहीं पाते थे, वे अब इसे सुविधापूर्वक पढ़ सकते हैं। यह सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी स्थूलाक्षरी संस्करण vedickarts.com पर उपलब्ध है।
आज भी सत्यार्थ प्रकाश उतना ही प्रासंगिक है जितना 19वीं शताब्दी में था। समाज में व्याप्त अन्धविश्वास, पाखण्ड एवं धार्मिक भ्रम के निवारण के लिए यह ग्रन्थ एक शाश्वत मार्गदर्शक है। इस Satyarth Prakash Hindi स्थूलाक्षरी संस्करण में बड़े अक्षरों के साथ-साथ पाठ की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट है जिससे पढ़ने का अनुभव अत्यन्त सुखद है। वैदिक धर्म के जिज्ञासु एवं आर्य समाज के अनुयायी इस सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी को vedickarts.com से अभी मँगाएँ।
सत्यार्थ प्रकाश की रचना स्वामी दयानन्द ने दो बार की। प्रथम संस्करण 1875 में तथा परिमार्जित एवं परिवर्धित संस्करण 1884 में प्रकाशित हुआ। इस Satyarth Prakash Hindi स्थूलाक्षरी संस्करण में परिमार्जित संस्करण का ही प्रामाणिक पाठ प्रस्तुत किया गया है। आर्य समाज की प्रत्येक शाखा में सत्यार्थ प्रकाश का नियमित पारायण होता है। यह सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी का बड़े अक्षरों वाला संस्करण उन सभी के लिए है जो इस महान् ग्रन्थ को सम्पूर्ण श्रद्धा एवं सुविधा के साथ पढ़ना चाहते हैं। vedickarts.com पर उपलब्ध है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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