Maharshi Dayanand ka Apurva Patra Vyavahar (महर्षि दयानंद का अपूर्व पत्र व्यवहार) | Pandit Rajendra Jigyasu

Description
Dayanand Patra Vyavahar is a rare and invaluable collection of letters written by Maharshi Dayananda Saraswati, edited and compiled by the distinguished Arya Samaj scholar Pandit Rajendra Jigyasu. दयानंद पत्र व्यवहार का यह संकलन महर्षि के विचारों, व्यक्तित्व एवं आर्य समाज-कार्य को उनके ही शब्दों में प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत करता है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह दुर्लभ ग्रन्थ इतिहास-प्रेमियों एवं शोधार्थियों के लिए अमूल्य है।
Dayanand Patra Vyavahar — महर्षि दयानन्द का व्यक्तित्व एवं पत्र-परम्परा
महर्षि दयानन्द सरस्वती केवल एक धार्मिक सुधारक नहीं थे — वे एक असाधारण विद्वान्, विचारक, वक्ता एवं संगठक भी थे। उनके विचारों एवं व्यक्तित्व को समग्र रूप से समझने के लिए उनके ग्रन्थों के अध्ययन के साथ-साथ उनके पत्र-व्यवहार का अध्ययन भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस Dayanand Patra Vyavahar संकलन में उनके पत्र केवल व्यक्तिगत सम्वाद नहीं हैं — ये वैदिक धर्म के पुनरुत्थान के उनके महान् संकल्प के जीवन्त दस्तावेज हैं।
दयानंद पत्र व्यवहार — संकलन की विशेषता एवं ऐतिहासिक महत्त्व
पण्डित राजेन्द्र जिज्ञासु — जो आर्य समाज के एक प्रतिष्ठित विद्वान् एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों के कुशल अन्वेषक हैं — ने इस दयानंद पत्र व्यवहार संकलन में महर्षि द्वारा विभिन्न विद्वानों, राजपुरुषों, आर्य समाज के कार्यकर्ताओं तथा सामान्य जिज्ञासुओं को लिखे पत्र सम्मिलित किए हैं। प्रत्येक पत्र में उनकी भाषा की सरलता, विचारों की गहराई तथा उद्देश्य की दृढ़ता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
इन Dayanand Patra Vyavahar पत्रों में महर्षि की वैदिक विद्वत्ता, व्यावहारिक दूरदर्शिता, संगठन-कुशलता तथा निर्भीक सत्यनिष्ठा के अनेक प्रमाण मिलते हैं। तत्कालीन समाज, राजनीति एवं धर्म के सन्दर्भ में लिखे गए इन पत्रों से स्वामी जी के व्यक्तित्व के अनेक नवीन एवं अल्पज्ञात पक्ष उद्घाटित होते हैं। कुछ पत्रों में उनकी प्रखर तर्कशक्ति का परिचय मिलता है तो कुछ में उनकी असीम करुणा एवं मनुष्यमात्र के प्रति प्रेम प्रकट होता है।
सम्पादक पण्डित राजेन्द्र जिज्ञासु ने प्रत्येक पत्र के ऐतिहासिक सन्दर्भ को भी सुस्पष्ट किया है जिससे यह दयानंद पत्र व्यवहार संकलन और भी अधिक पठनीय एवं उपयोगी बन गया है। पत्रों की पृष्ठभूमि, तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा पत्राचार का ऐतिहासिक महत्त्व — इन सभी विषयों पर सम्पादक की टिप्पणियाँ ग्रन्थ को एक सम्पूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बनाती हैं।
Dayanand Patra Vyavahar — शोधार्थियों के लिए प्राथमिक स्रोत
ये पत्र 19वीं शताब्दी के भारत की धार्मिक, सामाजिक एवं बौद्धिक पृष्ठभूमि को समझने का एक महत्त्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत हैं। आर्य समाज के इतिहासकारों, महर्षि दयानन्द के जीवन-चरित्र के अध्येताओं तथा 19वीं शताब्दी के भारतीय धार्मिक आन्दोलनों के शोधार्थियों के लिए यह Dayanand Patra Vyavahar ग्रन्थ एक अपरिहार्य सन्दर्भ है। vedickarts.com पर यह दयानंद पत्र व्यवहार संकलन महर्षि को उनके ही शब्दों में जानने का अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
पण्डित राजेन्द्र जिज्ञासु ने अपने जीवन के अनेक वर्ष महर्षि दयानन्द से सम्बन्धित दुर्लभ सामग्री के अन्वेषण एवं संकलन में लगाए हैं। इस Dayanand Patra Vyavahar संकलन में उनकी उस अथक शोध-साधना का फल समाहित है। जो पत्र अभिलेखागारों एवं व्यक्तिगत संग्रहों में बिखरे हुए थे उन्हें एकत्रित कर एक सुव्यवस्थित ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत करना एक असाधारण विद्वत्-उपलब्धि है।
इन दयानंद पत्र व्यवहार पत्रों को पढ़कर पाठक यह अनुभव करते हैं कि महर्षि दयानन्द केवल एक धर्म-प्रचारक नहीं थे, वे एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी संगठक एवं असाधारण संवेदनशील मनुष्य भी थे। उनके पत्रों में जो आत्मीयता एवं विनम्रता झलकती है वह उनके महान् व्यक्तित्व के एक अन्यथा अल्पज्ञात पहलू को प्रकाशित करती है।
Dayanand Patra Vyavahar का यह संकलन आर्य समाज के इतिहास को एक नई दृष्टि से समझने का अवसर प्रदान करता है। महर्षि की योजनाएँ, उनके सहयोगियों से उनके सम्बन्ध, तत्कालीन समाज के प्रति उनकी चिन्ताएँ — सभी कुछ इन पत्रों में जीवन्त रूप से प्रकट होता है। यह दयानंद पत्र व्यवहार ग्रन्थ vedickarts.com पर सुलभ है।
महर्षि दयानन्द के इन पत्रों से यह भी स्पष्ट होता है कि उन्होंने सम्पूर्ण भारत में एक सुसंगठित वैदिक आन्दोलन खड़ा करने के लिए कितने सचेत एवं व्यवस्थित प्रयास किए। विभिन्न नगरों में आर्य समाज की शाखाएँ स्थापित करना, विद्वानों को उचित पदों पर नियुक्त करना एवं वैदिक साहित्य के प्रकाशन को प्रोत्साहित करना — इन सभी कार्यों का विवरण इस Dayanand Patra Vyavahar संकलन में मिलता है। यह दयानंद पत्र व्यवहार ग्रन्थ महर्षि के संगठन-कौशल का एक अमूल्य प्रमाण है।
यह Dayanand Patra Vyavahar संकलन महर्षि दयानन्द सरस्वती को समझने का एक दुर्लभ एवं अद्वितीय माध्यम है। उनके पत्र पढ़कर पाठक उनके साथ एक आत्मीय सम्बन्ध अनुभव करते हैं। पण्डित राजेन्द्र जिज्ञासु की यह सम्पादन-कृति आर्य समाज के साहित्यिक भण्डार में एक अमूल्य अभिवृद्धि है। यह दयानंद पत्र व्यवहार ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।
इस Dayanand Patra Vyavahar संकलन में सम्मिलित पत्रों की भाषा, शैली एवं विषय-वस्तु — ये सभी तत्त्व महर्षि दयानन्द के महान् व्यक्तित्व को एक नया आयाम प्रदान करते हैं। आर्य समाज का प्रत्येक अनुयायी एवं महर्षि दयानन्द का प्रत्येक प्रशंसक इस दयानंद पत्र व्यवहार ग्रन्थ को अपने संग्रह में अवश्य सम्मिलित करे। यह पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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