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त्रैतसिद्धान्तादर्श Trait-Siddhantadarsh

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Description

त्रैतसिद्धान्तादर्श” एक महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ है जिसमें त्रैतवाद (तीन शाश्वत तत्त्वों का सिद्धांत) का विस्तृत विवेचन किया गया है। यह ग्रंथ वैदिक दर्शन की उस परंपरा को स्पष्ट करता है जिसमें ईश्वर, जीव और प्रकृति को तीन अनादि-नित्य तत्त्व माना गया है। यह विचारधारा विशेष रूप से वैदिक दर्शन और आर्यसमाज की दार्शनिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

त्रैतवाद का सिद्धांत

इस ग्रंथ में तीन मूल तत्त्वों को शाश्वत बताया गया है—

  1. ईश्वर (परमात्मा)
    सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सृष्टि का नियन्ता।

  2. जीव (आत्मा)
    चेतन, कर्म करने वाला और कर्मफल भोगने वाला तत्त्व।

  3. प्रकृति
    जड़ तत्त्व जिससे सृष्टि का निर्माण होता है।

इन तीनों तत्त्वों के परस्पर संबंध, गुण और कार्य का विश्लेषण इस पुस्तक में दार्शनिक रूप से किया गया है।

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