Shabd Roopavali (शब्द रूपावली) | Pandit Yudhishthir Meemansak | Sanskrit Grammar Declension Book

Description
Shabd Roopavali by Pandit Yudhishthir Meemansak is the most systematic and comprehensive Sanskrit noun declension reference available for students, teachers, and scholars of classical Sanskrit grammar. शब्द रूपावली संस्कृत व्याकरण की इस महत्त्वपूर्ण कृति में सातों विभक्तियों एवं तीनों वचनों में शब्द-रूपों का सुव्यवस्थित तालिकाबद्ध संकलन प्रस्तुत किया गया है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह ग्रन्थ प्रत्येक संस्कृत-अध्येता के लिए अनिवार्य है।
Shabd Roopavali Sanskrit — शब्द-रूपों का महत्त्व
संस्कृत व्याकरण के अध्ययन में शब्द-रूपों का ज्ञान मूलभूत एवं अनिवार्य है। पाणिनीय व्याकरण की सुदीर्घ परम्परा में शब्दों के विभिन्न विभक्तियों एवं वचनों में रूपान्तरण को ‘शब्द-रूप’ कहा जाता है। संस्कृत की समस्त रचना-प्रक्रिया इन्हीं शब्द-रूपों पर आधारित है। जब तक इनकी सम्यक् जानकारी नहीं होती तब तक संस्कृत के किसी भी ग्रन्थ — चाहे वह वेद हो, उपनिषद् हो, रामायण हो या महाभारत — का अध्ययन अधूरा ही रहता है।
पण्डित युधिष्ठिर मीमांसक — संस्कृत व्याकरण एवं वैदिक साहित्य के क्षेत्र में एक सुपरिचित एवं प्रतिष्ठित विद्वान् — की यह Shabd Roopavali कृति इसी आवश्यकता की पूर्ति के उद्देश्य से संकलित एक अत्यन्त उपयोगी एवं संग्रहणीय कोष-ग्रन्थ है। उनकी व्याकरण-शास्त्र पर गहरी पकड़ इस ग्रन्थ की रचना-शैली एवं सुव्यवस्थित संकलन-पद्धति में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
शब्द रूपावली — विभक्ति, वचन एवं लिंग के रूपों का संकलन
इस Shabd Roopavali पुस्तक में संस्कृत के विभिन्न प्रकार के शब्दों — पुंलिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग — के सातों विभक्तियों तथा तीनों वचनों में रूपों का तालिकाबद्ध विवरण दिया गया है। अकारान्त, इकारान्त, उकारान्त, ऋकारान्त, दीर्घ-स्वरान्त एवं व्यञ्जनान्त — सभी प्रकार के शब्दों के रूपों को सारणी-रूप में प्रस्तुत करने से यह ग्रन्थ त्वरित एवं विश्वसनीय सन्दर्भ-स्रोत बन जाता है।
Shabd Roopavali Sanskrit — परीक्षार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगिता
शास्त्रीय संस्कृत साहित्य, वेद, उपनिषद्, स्मृति, पुराण एवं दर्शन-ग्रन्थों के अध्ययन में जो शब्द-रूप बार-बार आते हैं उनका इस शब्द रूपावली संस्कृत ग्रन्थ में विशेष संकलन किया गया है। परीक्षार्थियों के लिए यह ग्रन्थ विशेष रूप से सहायक है क्योंकि संस्कृत की अधिकांश परीक्षाओं में शब्द-रूपों पर आधारित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
हिन्दी एवं संस्कृत दोनों माध्यमों में संकेतों के साथ प्रस्तुत यह शब्द रूपावली ग्रन्थ द्विभाषी संस्कृत-शिक्षण के लिए विशेष उपयोगी है। जो भी संस्कृत भाषा को गम्भीरता से सीखना चाहते हैं उनके अध्ययन-संग्रह में यह Shabd Roopavali का होना अत्यन्त आवश्यक है। यह पुस्तक संस्कृत-अध्यापकों, शोधार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों के लिए एक अमूल्य शैक्षणिक साधन है।
पण्डित युधिष्ठिर मीमांसक ने अपने दीर्घ अध्ययन एवं अध्यापन के अनुभव के आधार पर इस Shabd Roopavali को तैयार किया है। उनकी यह कृति संस्कृत-शिक्षण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण अवदान है। संस्कृत भाषा के मानकीकरण एवं उसे सर्वसुलभ बनाने के उनके प्रयासों में यह शब्द रूपावली संस्कृत ग्रन्थ एक विशेष स्थान रखता है।
इस Shabd Roopavali में उन शब्दों को प्राथमिकता दी गई है जो वैदिक एवं लौकिक संस्कृत दोनों में बहुलता से प्रयुक्त होते हैं। इससे छात्रों को एक ही ग्रन्थ से वैदिक एवं शास्त्रीय दोनों प्रकार की संस्कृत पढ़ने में सहायता मिलती है। रामायण, महाभारत, भागवत एवं अन्य पुराणों में बार-बार आने वाले शब्दों के रूपों का विशेष संकलन इस ग्रन्थ को और भी व्यावहारिक बनाता है।
संस्कृत-भाषा के पुनरुत्थान एवं प्रसार के इस युग में यह शब्द रूपावली संस्कृत ग्रन्थ एक अत्यन्त उपयोगी साधन है। डिजिटल युग में भी मुद्रित सन्दर्भ-ग्रन्थ की उपयोगिता अक्षुण्ण है क्योंकि परीक्षा-कक्ष में या ध्यान-साधना के समय यह Shabd Roopavali पुस्तक तुरन्त सन्दर्भ के लिए अत्यन्त सुविधाजनक है। vedickarts.com पर यह सहज उपलब्ध है।
शब्द रूपावली संस्कृत के इस ग्रन्थ का उपयोग न केवल व्याकरण-कक्षाओं में अपितु संस्कृत-भजन एवं वैदिक मन्त्रों के अर्थ-बोध में भी किया जा सकता है। जब पाठक किसी वैदिक मन्त्र में किसी शब्द के रूप को पहचानना चाहते हैं तो यह Shabd Roopavali एक त्वरित एवं विश्वसनीय सन्दर्भ-ग्रन्थ के रूप में काम आती है। यह ग्रन्थ संस्कृत-ज्ञान के विस्तार में एक अमूल्य सहायक है।
इस Shabd Roopavali के माध्यम से पण्डित युधिष्ठिर मीमांसक ने संस्कृत-शिक्षण को एक नई दिशा दी है। जटिल व्याकरणिक नियमों को सरल तालिकाओं में प्रस्तुत करने की उनकी पद्धति अनुकरणीय है। यह शब्द रूपावली संस्कृत पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है और इसे अपने पुस्तकालय में अवश्य सम्मिलित करें।
शब्द रूपावली संस्कृत के इस अनमोल ग्रन्थ का अध्ययन संस्कृत-साधना को सरल एवं सुखद बनाता है। विद्यालय के छात्रों से लेकर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों तक तथा नवसाधक से लेकर अनुभवी विद्वान् तक — प्रत्येक के लिए यह Shabd Roopavali एक अत्यन्त उपयोगी सन्दर्भ-ग्रन्थ है। पण्डित युधिष्ठिर मीमांसक की यह कृति संस्कृत-भाषा के प्रसार में एक स्थायी योगदान है जिसे vedickarts.com से सहज प्राप्त किया जा सकता है।
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