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वैदिक इतिहास | Vedic Itihas – स्वामी शरण

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Description

वैदिक इतिहास — भारतीय ज्ञान परम्परा का मूल स्रोत

भारतीय सभ्यता का आधार वेद हैं। वेदों में केवल धार्मिक मंत्र नहीं, अपितु एक सम्पूर्ण जीवन-दर्शन, विज्ञान, समाज-व्यवस्था और इतिहास-बोध समाहित है। वैदिक इतिहास इसी महान परम्परा को व्यवस्थित, प्रामाणिक और शोधपूर्ण दृष्टि से प्रस्तुत करने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

स्वामी शरण द्वारा रचित यह ग्रन्थ उन पाठकों के लिए एक अमूल्य संसाधन है जो वैदिक काल की सभ्यता, संस्कृति, राज-व्यवस्था और ऋषि-परम्परा को गहराई से समझना चाहते हैं। लेखक ने वैदिक वाङ्मय के प्रामाणिक स्रोतों — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद तथा ब्राह्मण ग्रन्थों — के आधार पर भारतीय इतिहास की एक सुदृढ़ एवं तर्कसंगत व्याख्या प्रस्तुत की है।

वैदिक इतिहास का अध्ययन क्यों आवश्यक है?

आधुनिक काल में भारतीय इतिहास की व्याख्या प्रायः पाश्चात्य दृष्टिकोण से की जाती रही है, जिसमें वैदिक सभ्यता को या तो सीमित कर दिया गया अथवा उसकी वास्तविक गहराई को नकार दिया गया। स्वामी शरण ने इस ग्रन्थ में उस रिक्तता को भरने का प्रयास किया है। उन्होंने वैदिक ऋचाओं, उपनिषदों एवं ब्राह्मण साहित्य में उपलब्ध ऐतिहासिक संकेतों को एकत्र कर, एक ऐसा विवरण प्रस्तुत किया है जो भारतीय परम्परा की दृष्टि से प्रामाणिक और बौद्धिक दृष्टि से समृद्ध है।

ग्रन्थ की विशेषताएं:

वैदिक काल की सामाजिक संरचना, आश्रम-व्यवस्था, गुरुकुल परम्परा और ऋषि-शिष्य संवाद की विस्तृत चर्चा इस ग्रन्थ को अन्य इतिहास-ग्रन्थों से विशिष्ट बनाती है। इसके साथ ही वैदिक यज्ञ-परम्परा, राजधर्म एवं लोकतान्त्रिक मूल्यों की जड़ें वेदों में कहाँ और कैसे उपस्थित हैं — इसका विश्लेषण इस पुस्तक की बौद्धिक उपलब्धि है।

संस्कृत के मूल श्लोकों एवं वैदिक ऋचाओं को हिन्दी में सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है, जिससे यह ग्रन्थ न केवल संस्कृत विद्वानों के लिए, अपितु सामान्य हिन्दी पाठकों के लिए भी उपयोगी है।

किनके लिए है यह ग्रन्थ?

यह ग्रन्थ उन सभी जिज्ञासु पाठकों के लिए है जो भारतीय इतिहास को वैदिक परम्परा की दृष्टि से समझना चाहते हैं। संस्कृत के छात्र, आर्य समाज के अनुयायी, वेदान्त एवं दर्शन में रुचि रखने वाले शोधार्थी, तथा भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित बुद्धिजीवी — सभी इस ग्रन्थ से लाभान्वित होंगे।

भारत के गौरवशाली अतीत को समझे बिना उसके वर्तमान और भविष्य की सार्थक व्याख्या सम्भव नहीं। वैदिक इतिहास इसी दिशा में एक सुदृढ़, विद्वत्तापूर्ण एवं प्रेरणादायी कदम है।

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