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Vedic Shabdkosh (Laghu Sanskaran) | Vedic Dictionary Hindi-Sanskrit | Swami Saran

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Description

वैदिक शब्द कोश — भारतीय वाङ्मय की आधारशिला

भाषा किसी भी सभ्यता की आत्मा होती है। और यदि वह भाषा संस्कृत हो — जो समस्त भारतीय ज्ञान-परम्परा की जननी है — तो उसके शब्दों का सटीक, धातुज एवं व्याकरण-सम्मत अर्थ जानना अत्यन्त आवश्यक हो जाता है। स्वामी शरण द्वारा रचित वैदिक शब्द कोश (लघु संस्करण) इसी महत् आवश्यकता की पूर्ति करने वाला एक ऐतिहासिक ग्रन्थ है।

यह शब्दकोश केवल शब्दों की सूची नहीं है — यह वैदिक ऋचाओं में प्रयुक्त पदों की धातुज व्युत्पत्ति, व्याकरण-सम्मत प्रमाण एवं निष्पक्ष अर्थ-विवेचन का एक सुव्यवस्थित एवं प्रामाणिक संकलन है। इतिहास में सर्वप्रथम इस प्रकार का वैदिक शब्दकोश प्रस्तुत किया गया है — यह इस ग्रन्थ की सबसे बड़ी विशेषता एवं उपलब्धि है।

वैदिक शब्दों के अर्थ क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?

वेदों का अध्ययन करते समय सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वैदिक संस्कृत के अनेक शब्दों के अर्थ लौकिक संस्कृत से भिन्न हैं। पाश्चात्य विद्वानों एवं अनेक परवर्ती टीकाकारों ने इन शब्दों की व्याख्या अपने-अपने दृष्टिकोण से की, जिससे वैदिक साहित्य के वास्तविक तात्पर्य को लेकर भ्रम उत्पन्न होता रहा। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने यह स्पष्ट किया था कि वेदों के शब्दों का अर्थ धातु और व्याकरण के आधार पर ही किया जाना चाहिए — स्वामी शरण का यह ग्रन्थ उसी परम्परा को आगे बढ़ाता है।

ग्रन्थ की विशेषताएं:

इस शब्दकोश में वैदिक पदों का अर्थ-निर्धारण पाणिनीय व्याकरण, धातुपाठ एवं निरुक्त के आधार पर किया गया है। प्रत्येक शब्द के साथ उसकी मूल धातु, प्रत्यय और व्याकरणिक प्रमाण दिया गया है, जिससे पाठक न केवल अर्थ जान सके, अपितु उस अर्थ के पीछे की तर्क-प्रक्रिया को भी समझ सके।

लघु संस्करण होने के कारण यह ग्रन्थ संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित है। यह उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो वेदाध्ययन की प्रारम्भिक अवस्था में हैं अथवा जो एक सुलभ एवं विश्वसनीय वैदिक शब्द-सन्दर्भ ग्रन्थ की खोज में हैं।

किनके लिए है यह ग्रन्थ?

संस्कृत एवं वेदाध्ययन के छात्र, आर्य समाज के अनुयायी, वैदिक साहित्य के शोधार्थी, गुरुकुल एवं वैदिक विद्यालयों के आचार्य, तथा वे सभी बुद्धिजीवी जो वेदों को उनके मूल एवं प्रामाणिक अर्थ में समझना चाहते हैं — इस ग्रन्थ से विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।

वैदिक शब्दों का सही अर्थ जाने बिना वेदों का सच्चा ज्ञान सम्भव नहीं। वैदिक शब्द कोश इसी दिशा में स्वामी शरण का एक अमूल्य, ऐतिहासिक एवं शोधपूर्ण अवदान है।

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