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वैदिक धात्वादि कोश | Vedic Dhatvaadi Kosh – स्वामी शरण

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Description

वैदिक धात्वादि कोश संस्कृत व्याकरण तथा वैदिक भाषा के गंभीर अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ है। इस ग्रंथ में पाणिनि तथा काशकृत्स्न परम्परा के धातुपाठों को समाहित कर एक व्यवस्थित धातुकोश प्रस्तुत किया गया है, जिससे संस्कृत भाषा के मूल रूपों और शब्द-निर्माण की प्रक्रिया को समझना सरल हो जाता है।

संस्कृत भाषा में “धातु” शब्द का अर्थ क्रिया-मूल या मूलभूत ध्वनि-तत्व से है, जिनसे विभिन्न शब्द, रूप और वाक्य निर्मित होते हैं। पाणिनि के धातुपाठ में लगभग दो हजार धातुओं को वर्गीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो संस्कृत व्याकरण अध्ययन की आधारशिला माने जाते हैं।

यह ग्रंथ केवल धातुओं की सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उपसर्ग, अव्यय, संख्या, सर्वनाम आदि को भी सम्मिलित किया गया है, जिससे संस्कृत साहित्य के व्यापक अध्ययन में सहायता मिलती है। वेदों सहित समस्त संस्कृत ग्रंथों के शब्दार्थ और व्याकरणिक विश्लेषण के लिए यह कोश अत्यंत उपयोगी उपकरण सिद्ध होता है।

वैदिक भाषा और शास्त्रीय संस्कृत के अध्ययन में धातु-ज्ञान का विशेष महत्व है, क्योंकि संस्कृत के अधिकांश शब्द इन्हीं मूल धातुओं से व्युत्पन्न होते हैं। धातु-कोश का अध्ययन करने से पाठक न केवल शब्दरूप और क्रियारूप की संरचना समझ पाता है, बल्कि भाषा के दार्शनिक और सांस्कृतिक आधार को भी जान सकता है।

स्वामी शरण द्वारा प्रस्तुत यह संस्करण वैदिक अध्ययन को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह ग्रंथ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, व्याकरण-अध्येताओं तथा संस्कृत-प्रेमियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

इस पुस्तक के माध्यम से पाठक संस्कृत शब्दों के विभिन्न रूपों, उनके मूल अर्थ और प्रयोग को समझकर वैदिक तथा शास्त्रीय साहित्य का अधिक गहन अध्ययन कर सकते हैं। इस प्रकार यह ग्रंथ केवल एक शब्दकोश नहीं बल्कि संस्कृत भाषा-विज्ञान और वैदिक परंपरा के अध्ययन का एक सशक्त साधन है।

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