वेद में भौतिकी विज्ञान | Ved Mein Bhautiki Vigyan (Hindi-Sanskrit)

Description
“वेद में भौतिकी विज्ञान” एक महत्वपूर्ण वैदिक-वैज्ञानिक ग्रंथ है, जिसका उद्देश्य वेदों में निहित भौतिक विज्ञान से सम्बद्ध सिद्धांतों और अवधारणाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। भारतीय ज्ञान परंपरा में वेदों को मानव सभ्यता का प्राचीनतम ज्ञानस्रोत माना गया है। इनमें धर्म, दर्शन, चिकित्सा, समाजशास्त्र और विज्ञान सहित जीवन के विभिन्न आयामों का समन्वित वर्णन मिलता है।
वेदों में वर्णित “अग्नि” को केवल अग्नि-तत्व के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा के सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में भी समझा गया है। वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार अग्नि ताप, प्रकाश, गति और परिवर्तन की मूल शक्ति का प्रतीक है, जिसे आधुनिक भौतिकी विभिन्न ऊर्जा रूपों में विभाजित करती है।
भौतिक विज्ञान के संदर्भ में वैदिक साहित्य में ऊर्जा, प्रकाश, सूर्य-तत्व, ध्वनि, गति तथा प्रकृति के नियमों से संबंधित विचार मिलते हैं। वैदिक दर्शन में “तेजस्” (प्रकाश या ऊर्जा) को ब्रह्मांड में व्याप्त मूल शक्ति माना गया है, जो चेतना और प्रकृति दोनों के साथ संबंध स्थापित करती है।
ऋग्वेद और अन्य वैदिक ग्रंथों में अग्नि के विभिन्न रूपों का वर्णन मिलता है—जैसे सूर्य का तेज, विद्युत, वायवीय ऊर्जा और स्थलीय अग्नि। इन रूपों को प्राकृतिक ऊर्जा के विविध स्वरूपों के प्रतीक के रूप में देखा गया है। वैदिक परंपरा में अग्नि को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मूल सिद्धांत से जोड़ा गया है, जो सृष्टि, परिवर्तन और जीवन के संचालन में भूमिका निभाती है।
इस पुस्तक में लेखक ने वैदिक मंत्रों और वैदिक साहित्य के आधार पर भौतिक विज्ञान से संबंधित सिद्धांतों—जैसे ऊर्जा के रूप, प्राकृतिक शक्तियाँ, सूर्य-ऊर्जा, ध्वनि-तरंगें और प्रकृति के नियम—का विवेचन करने का प्रयास किया है। यह ग्रंथ वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सेतु स्थापित करने का प्रयास करता है, जिससे पाठक समझ सकें कि प्राचीन भारतीय चिंतन में विज्ञान का स्वरूप किस प्रकार से विकसित हुआ।
यह पुस्तक विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो वैदिक विज्ञान, भारतीय दर्शन और भौतिकी के ऐतिहासिक दृष्टिकोण में रुचि रखते हैं। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए यह एक प्रेरणादायक अध्ययन सामग्री हो सकती है।
समग्र रूप से, “वेद में भौतिकी विज्ञान” वैदिक साहित्य में निहित वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह ग्रंथ पाठकों को वैदिक ज्ञान की व्यापकता और उसकी आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संभावित प्रासंगिकता का बोध कराता है।
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