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Dayanad Sukti aur shubhashit महर्षि दयानन्द

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Description

महर्षि दयानन्द 19वीं शताब्दी के वेदों के सबसे बड़े विद्वान्
थे। वे मन्त्रद्रष्टा ऋषि थे। महर्षि ने दस वर्ष के अल्पकाल में
जहाँ सहस्रों व्याख्यान दिये, सैकड़ों शास्त्रार्थ किये, वहाँ विपुल
साहित्य का भी निर्माण किया। महर्षि दयानन्द का साहित्य भारत
की अमूल्य निधि है। महर्षि के ग्रन्थों ने कोटि-कोटि मानवों के
मन-मन्दिरों को ज्ञानालोक से आलोकित किया है।
हमने महर्षि के विशाल, विपुल एवं
गम्भीर साहित्य का मन्थन करके उसमें से कुछ रत्न निकालने
का प्रयत्न किया है। लगभग तीन सौ रत्नों की एक माला गूँथकर
हम पाठकों की सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं। यह माला कैसी है,
इसका निर्णय तो पाठक ही कर सकेंगे।

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